Saturday, May 04, 2019

Story


1@ एक गांव था। उस गांव में लोग श्रमदान से चौपाल बना रहे थे। गांव के सभी लोग काम में लगे हुए थे। लेकिन वहां एक व्यक्ति उदास खड़ा हुआ था। गांव के सरपंच ने जब यह देखा तो वो उस व्यक्ति के पास गए।
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सरपंच ने उस व्यक्ति से कहा, 'आपको काम में हाथ बंटाना चाहिए।' उस व्यक्ति ने कहा,'सरपंच जी मैं तीन दिन से भूखा हूं।' तब सरपंच ने कहा, 'ठीक है भाई तुम मेरे घर जाकर भोजन कर लो।' वह व्यक्ति सरपंच के घर गया और उसने पेट भर के भोजन किया।
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अब सरपंच ने कहा, 'तुमने भोजन तो कर लिया अब काम में हाथ बंटाओ।' वह व्यक्ति बोला, 'नहीं सरपंच जी क्योंकि मेरा पेट भर गया है। मैं आपके यहां थोड़ी देर आराम करना चाहूंगा।'

संक्षेप में 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

किसी ने सही कहा है कि 'अवसर खोजने वाले अवसर खोज लेते हैं और बहाना खोजने वाले बहाना।'
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2@: गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों और अनुयायियों को मौखिक शिक्षा दी है। बाद में इसे उनके अनुयायियों द्वारा संकलित किया गया। बुद्ध अपने प्रवचन में मुख्य बातों पर ही जोर देते थे। तथागत कभी सुनने वाले के विचारों का विरोध न करते और न ही तर्क करते थे।💐💐💐💐💐💐💐💐

बल्कि उस व्‍यक्ति के विचारों को अपनाकर उससे प्रश्‍न करते ताकि सुनने वाला अपने विचार खोलकर सामने रख सके। इस तरह बुद्ध उस व्‍यक्ति को उसके विचार और दृष्टिकोण को सुधारने तथा सत्‍य को गहराई से समझने में सहायता करते थे।

एक बार एक शोकाकुल मा अपने मृत बच्चे के साथ बुद्ध के पास आईं। वह रो रहीं थीं। बुद्ध ने उनका दुख सुना। वह महिला चाहती थी, तथागत उस मृत बच्चे को जीवित कर दें। तब बुद्ध ने उस महिला से कहा आप ऐसे घर से सरसों के दाने लेकर आएं। जहां किसी की मृत्यु नहीं हुई हो।‼‼

वह महिला उस गांव में मौजूद हर घर में गई लेकिन ऐसा कोई भी घर नहीं था। जहां कभी किसी की मृत्यु नहीं हुई हो। वह तथागत की बात समझ गईं। और पुनः उनके पास पहुंची। इसके बाद उन्होंने अपने बच्चे का अंतिम संस्कार किया।💐💐💐💐🌸🌸🌸🌸🌸🌸

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गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों और अनुयायियों को मौखिक शिक्षा दी है। बाद में इसे उनके अनुयायियों द्वारा संकलित किया गया। बुद्ध अपने प्रवचन में मुख्य बातों पर ही जोर देते थे। तथागत कभी सुनने वाले के विचारों का विरोध न करते और न ही तर्क करते थे।

बल्कि उस व्‍यक्ति के विचारों को अपनाकर उससे प्रश्‍न करते ताकि सुनने वाला अपने विचार खोलकर सामने रख सके। इस तरह बुद्ध उस व्‍यक्ति को उसके विचार और दृष्टिकोण को सुधारने तथा सत्‍य को गहराई से समझने में सहायता करते थे।

एक बार एक शोकाकुल मा अपने मृत बच्चे के साथ बुद्ध के पास आईं। वह रो रहीं थीं। बुद्ध ने उनका दुख सुना। वह महिला चाहती थी, तथागत उस मृत बच्चे को जीवित कर दें। तब बुद्ध ने उस महिला से कहा आप ऐसे घर से सरसों के दाने लेकर आएं। जहां किसी की मृत्यु नहीं हुई हो।

वह महिला उस गांव में मौजूद हर घर में गई लेकिन ऐसा कोई भी घर नहीं था। जहां कभी किसी की मृत्यु नहीं हुई हो। वह तथागत की बात समझ गईं। और पुनः उनके पास पहुंची। इसके बाद उन्होंने अपने बच्चे का अंतिम संस्कार किया।🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
\: ♨♨♨♨♨♨♨♨♨♨♨♨♨♨♨♨♨♨🌸🌸🌸💐💐💐 एक गांव था। उस गांव में लोग श्रमदान से चौपाल बना रहे थे। गांव के सभी लोग काम में लगे हुए थे। लेकिन वहां एक व्यक्ति उदास खड़ा हुआ था। गांव के सरपंच ने जब यह देखा तो वो उस व्यक्ति के पास गए।
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सरपंच ने उस व्यक्ति से कहा, 'आपको काम में हाथ बंटाना चाहिए।' उस व्यक्ति ने कहा,'सरपंच जी मैं तीन दिन से भूखा हूं।' तब सरपंच ने कहा, 'ठीक है भाई तुम मेरे घर जाकर भोजन कर लो।' वह व्यक्ति सरपंच के घर गया और उसने पेट भर के भोजन किया।
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अब सरपंच ने कहा, 'तुमने भोजन तो कर लिया अब काम में हाथ बंटाओ।' वह व्यक्ति बोला, 'नहीं सरपंच जी क्योंकि मेरा पेट भर गया है। मैं आपके यहां थोड़ी देर आराम करना चाहूंगा।'

संक्षेप में 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

किसी ने सही कहा है कि 'अवसर खोजने वाले अवसर खोज लेते हैं और बहाना खोजने वाले बहाना।'
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[16:21, 5/2/2019] atomy shyam tripathi: 💐💐💐💐 12 अक्टूबर वर्ष 1492 के दिन, खोजी नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस का अभियान कैरेबियन पहुंचा। कोलंबस ने यात्रा के दौरान खोजे आइलैंड का नाम सैन सैल्वाडोर रखा, जो आज 'बहामास 'के नाम से जाना जाता है। वो मान चुका था कि बाहामास, जापान है और यात्रा के दौरान उसने क्यूबा को चीन समझ लिया था।
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कोलंबस ने 'ला नैवीदाद' की भी खोज की थी, जिसे आज हैती कहा जाता है, ये दुनिया की पहली यूरोपीय कॉलोनी थी, कोलंबस ने वहां करीब 39 लोगों को जीवन बसाने के लिए छोड़ दिया था।
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वह अपने समय का एक प्रसिद्ध व्यक्ति था। उसे अगर साहस और आत्मविश्वास का दूसरा नाम कहें तो गलत नहीं होगा। जब वह अपने साथियों के साथ एक छोटे से जाहज पर नई दुनिया को ढूंढने निकला तो अचानक समुद्र में समुद्री तूफान आ गया।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
तीन दिनों और दो रातों तक कोलंबस का जहाज समुद्री पानी के थपेड़ों से चकनाचूर हो गया। उन दिनों जहाज इंजन से नहीं चलते थे। ऊंची बल्ली लगाकर हवा के बहाव के जरिए समुद्री यात्राएं की जाती थीं।
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जब जहाजा चकनाचूर हो गया। तो कोलंबस के सभी साथी घबरा गए। लेकिन कोलंबस ने हार नहीं मानी। वह थोड़ा आगे बड़ा। कोलंबस को दिशा बताने वाली दिशासूचक सूची भी खराब हो चुकी थी। लेकिन कोलंबस के चेहरे पर शिकन तक नहीं आया। उसने अपने सभी साथियों से कहा, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, लेकिन जीत हमारी ही होगी। कोलंबस सफल हुआ और उसे अपनी मंजिल मिल गई।

संक्षेप में
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यदि पूरी निष्ठा और साहस से अपने काम को अंजाम दिया जाए तो जीत हमारी हो होती है। हरिवंश राय बच्चन ने अपनी एक कविता में लिखा है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
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3@ 
12 अक्टूबर वर्ष 1492 के दिन, खोजी नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस का अभियान कैरेबियन पहुंचा। कोलंबस ने यात्रा के दौरान खोजे आइलैंड का नाम सैन सैल्वाडोर रखा, जो आज 'बहामास 'के नाम से जाना जाता है। वो मान चुका था कि बाहामास, जापान है और यात्रा के दौरान उसने क्यूबा को चीन समझ लिया था।
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कोलंबस ने 'ला नैवीदाद' की भी खोज की थी, जिसे आज हैती कहा जाता है, ये दुनिया की पहली यूरोपीय कॉलोनी थी, कोलंबस ने वहां करीब 39 लोगों को जीवन बसाने के लिए छोड़ दिया था।
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वह अपने समय का एक प्रसिद्ध व्यक्ति था। उसे अगर साहस और आत्मविश्वास का दूसरा नाम कहें तो गलत नहीं होगा। जब वह अपने साथियों के साथ एक छोटे से जाहज पर नई दुनिया को ढूंढने निकला तो अचानक समुद्र में समुद्री तूफान आ गया।
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तीन दिनों और दो रातों तक कोलंबस का जहाज समुद्री पानी के थपेड़ों से चकनाचूर हो गया। उन दिनों जहाज इंजन से नहीं चलते थे। ऊंची बल्ली लगाकर हवा के बहाव के जरिए समुद्री यात्राएं की जाती थीं।
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जब जहाजा चकनाचूर हो गया। तो कोलंबस के सभी साथी घबरा गए। लेकिन कोलंबस ने हार नहीं मानी। वह थोड़ा आगे बड़ा। कोलंबस को दिशा बताने वाली दिशासूचक सूची भी खराब हो चुकी थी। लेकिन कोलंबस के चेहरे पर शिकन तक नहीं आया। उसने अपने सभी साथियों से कहा, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, लेकिन जीत हमारी ही होगी। कोलंबस सफल हुआ और उसे अपनी मंजिल मिल गई।
संक्षेप में :-
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यदि पूरी निष्ठा और साहस से अपने काम को अंजाम दिया जाए तो जीत हमारी हो होती है। हरिवंश राय बच्चन ने अपनी एक कविता में लिखा है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
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